भारत में माइक्रोप्लास्टिक रैन?
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| Microplastics Ran In India? |
आज पूरी दुनिया में, जिसमें हमारा देश भी शामिल है, प्लास्टिक की वर्षा हो रही है. एनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्वोलॉजी में इसी हफ्ते छपी स्टडी के मुताबिक ये माइक्रोप्लास्टिक हैं, जो नंगी आंखों से नहीं दिखते, जिसे देख पाना साधारण नही है लेकिन जिन्हें इकट्ठा किया जाए तो प्लास्टिक का पहाड़ खड़ा हो जाएगा।
दरअसल ये माइक्रोप्लास्टिक हैं, जिनका साइज 5 मिलीमीटर जितना ही होता है, अब तो आप भी समझ गए होगे ये कितना खतरनाक है।
माइक्रोप्लास्टिक किधर पाये जाते हैं?
माइक्रोप्लास्टिक की वर्षा कैसे होती है?
माइक्रोप्लास्टिक ये खिलौनों, कपड़ों, गाड़ियों, पेंट, कार के पुराने पड़े टायर या किसी भी चीज में होते हैं हमारे पास से होते हुए ये वेस्टवॉटर में, और फिर समुद्र में पहुंच रहे हैं। यहां से समुद्र के इकोसिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं और फिर बारिश बनकर धरती पर वापस लौट आते हैं।
हमारे शरीर पर इन माइक्रोप्लास्टिक कणों का क्या प्रभाव पड़ता है?
माइक्रोप्लास्टिक के असर पर रिसर्च हुई, जिसमें खुलासा हुआ कि हम रोज लगभग 7 हजार माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े अपनी सांस के जरिए लेते हैं.पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी की स्टडी में माना गया कि ये वैसा ही है, जैसा तंबाखू खाना या सिगरेट पीना, फिलहाल ये पता नहीं लग सका कि प्लास्टिक की कितनी मात्रा सेहत पर बुरा असर डालना शुरू कर देती है, लेकिन ये बार-बार कहा जा रहा है कि इससे पाचन तंत्र से लेकर हमारी प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर होता है. प्लास्टिक कैंसर - कारक भी है।
आज हम सभी इन समस्याओं का सामना भी कर रहे हैं, जिससे हमें बचने की पूरी कोशिश करनी पड़ेगी।

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